1. एक छलावा है, किसी गाड़ी के कांच पे पड़ी भाप सी ज़िन्दगी,
    जितना लिखता हूँ कुछ उस पर,  उतना ही कुछ मिट जाता है।


    -मिस्रा 
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  2. ... जो कहना चाह रहा हूँ,
    वो शब्द नहीं मिल रहे,...
    और जो करना चाह रहा हूँ,
    वो मौके


    -मिस्रा 
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