Wednesday, September 12, 2018

जबसे तुम गयी हो, बहुत नज़दीक आ गयी हो।

जबसे तुम गयी हो,
न वो बिस्तर बदला है,
न सिलवटों को छेड़ा है मैंने,
रात भर एक किनारा पकड़ कर सोया भी हूँ मैं,
रात भर तरसते हैं होंठ, .. छाती को तुम्हारे,
रात भर उँगलियाँ दर्द करती हैं,.. 
रात भर कोई गाना सुनाता है, ऐसा लगता है,
कोई फेरता है हाँथ बदन पर, ऐसा लगता है,
कोई कस कर पकड़ता है, ऐसा लगता है,


कितने नज़दीक आ गयी हो?
रात भर तुम्हारी तस्वीर बात करती है मुझसे,
तुम्हारे बालों के ख़म में उलझा भी हूँ और खोया भी हूँ मैं,
ऐसा लगता है,... 
जबसे तुम गयी हो,
बहुत नज़दीक आ गयी हो। 


-मिस्रा 


 

Tuesday, September 4, 2018

potent

यहाँ एक गंध है जो उँगलियों में कहीं रह जाती है,
थूक में बनी हुई खाल की चाशनी की गंध,
'potent'. 
यहाँ दो जांघें हैं,
जिनके सिरे पर फिसलन है,
किसी नदी घाटी के किनारे जमी काई पे पड़ी बारिश की बूंदों सी... 
जिस पर हाथ पड़ते ही इंसान फिसल जाता है,
कोई कैसे रोके ख़ुद को, जब ईमान फिसल जाता है। 
यहाँ पुतलियों में डूब जाती हैं नज़रें,
पलकों में उलझ जाती है ज़िन्दगी,
यहाँ तर्जनी कुछ ढूँढा करती है,
उसकी भी,... 
... मेरी भी। 
यहाँ एक गंध है जो तर्जनी में कहीं रह जाती है,
थूक में थकी हुई भ्रमण की सूखी हुई गंध। 


-मिस्रा 







Thursday, August 30, 2018

ये ज़िन्दगी यूँ हाथ छोड़ देती है,
और आदमी कितना भी कोशिश कर ले,
पर फिसल जाता है,
कोई कुछ नहीं कर पाता,
फिर दुआएं होती हैं,
दवाएं होती हैं,
एक लड़का पैर सहलाता रहता है,
और एक पिता बीच- बीच में उठ कर,
उसको गले लगाता रहता है।
कितना मुश्क़िल होता है,
मौत का सामना करना,
एक countdown सा चलता रहता है
जिसका alarm और भी तेज़ होता जाता है,
कितना मुश्क़िल होता है,
सब जान कर भी तसल्ली देना,
"कुछ नहीं हुआ तुम्हें
ये दर्द है, जो सिर्फ़ सोचते हो तो है,
ये ज़िन्दगी भी इसी तरह, सिर्फ़ सोचते हो तो है। "
ये सिर्फ़ मौत है जो कोई सोचता नहीं,
... फिर भी है।


कितनी खोखली है ज़िन्दगी,
और मौत कितनी बुरी है,
तभी शायद ज़िनदगी समझ नहीं पाती, बस चलती रहती है यूँहीं,
और मौत से कोई किसी को बचा नहीं पाता।



-मिस्रा




आख़िर हमने ढूढ़ लिया,
वक़्त लगा,
दिल टूटे,
हमको कितनो ने नोचा। 
... तुमको कितनों ने बदनाम किया,
कितना बुझता है दिल,
ये सुन कर,
तुम कितनी अकेली थी उस पल,
मैं कितना .. तन्हां था। 
कितना मुश्किल था,
बिना तुम्हारी साँसों के,
क्या जाने ...  कैसे ज़िंदा था ?

मैंने तुमको,
तुमने मुझको,
आख़िर हमने ढूंढ लिया। 




-मिस्रा 










Thursday, August 16, 2018

एक चिता की आग में, कई जानें जल गयीं।
एक पिता जल गया,
एक पत्नी जल गयी,
एक पति जल गया,
उनका छोटा सा एक घर जल गया,
चिंगारी उड़ी,...
तो एक माँ और दो बेटों ने भी आग पकड़ ली,
अब वो तीनों,..
..
उम्र भर जलते रहेंगे।



-मिस्रा 

Saturday, August 11, 2018

.. अकेला

ये सारी कहानी अकेली है।
         कभी अकेलेपन से,
                 कभी मन से।
ये जितना छुपा रहा हूँ,
उतना damage हो रहा हूँ,
जितना बताता हूँ,... उतना नंगा।
फिर guilt मारती है।

कुछ देर को भूल जाता हूँ वजूद अपना,
कुछ दूर बहा ले जाती है वो,
फिर,.. हाथ फिसलता है,
(हमेशा होता है)
जो मैं दोबारा नहीं पकड़ता,
और तैरा करता हूँ,
... अकेला।


-मिस्रा





Friday, August 10, 2018

cognitive problem

मेरी तरफ़ देखते- देखते उसकी आंखें सूखती गयीं,
बड़ी होती गयीं,
और मैं...  और छोटा। 
इतना छोटा, और कितना असाहय,
कितना अकेला। 
कितना कुछ है कहने को उससे,
पर वो अब सुनता नहीं,
बस एक टक देखता रहता है,
कभी-कभी कुछ बोलता है, तो ख़यालों का.. 
.... न सर होता है, न पैर। 

कुछ समझ नहीं आया,
क्या हुआ? ... कैसे हुआ?
सब कहते रहे, "कितने मज़बूत हो तुम, ... कितने कारगर"
मैं सुनता रहा और खुद पर अनजाने शायद फ़क्र करता रहा। 
आज लिख रहा हूँ, तो बहुत शर्म आती है ख़ुद पर,
उधर कोई कराह रहा है,
और इधर मैं बस लिख रहा हूँ कि वो कराह रहा है,
कितना छोटा हूँ मैं। 
पर bukowski सही कहता था,
"Poetry is what happens when nothing else can"

कुछ नहीं कर पाया मैं। 



-मिस्रा