Thursday, December 13, 2012

hum bhi battiyan hote !

इन रौश्नियों   को देख़ कर 

आज ज़हन में इक ख़याल आया

काश

इनकी तरह हम भी चमकती हुई बत्तियां होते !

न अँधेरे का डर होता, न साये का सामना ,

बल्कि हम न जाने कितनी हि जिन्दगियों को साया देते .

काश..

इनकी तरह हम भी चमकती हुई बत्तियां होते !

मान क्या लें ?, हमे पता है।

कि हर वो चीज़ जो रौशन है, वो तपती है वीराने में।

पर, फ़िर भी  ..

कम से कम जल के रौशन होते, रौशनी से तो न जलते।

काश...

इनकी तरह हम भी चमकती हुई बत्तियां होते !

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