Friday, December 14, 2012

3 a.m. #2


तीन बजे रात के,
हम बिना बात के,

प्यार करने लगते हैं।
आँखों से आँखों और
होंठों से होंठों,
पे  वार करने लगते हैं।
सारा दोष,
तुम्हारी पीठ पर बने उस चित्र का है,
रेखाएँ निकलीं
और मुझको
कई बार भेदती गयीं,
घाव ताज़े हैं,
और तुम्हारे नाखून तेज़,
इसी लिये शायद ...
हम बिना बात के, तीन बजे रात के,
प्यार करने लगते हैं।


- प्रणव मिश्र

3 comments:

  1. तीन बज गए,बेबी.

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  2. pyar kar ne keliye na koi din hote hai, ya raat...bawra dil ko hai yeh na pata....

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