Thursday, May 2, 2013

गेंद

जब तुम बूढी हो जाओगी,
और मैं बूढा हो जाऊँगा ___

तुम wrinkle free लगाओगी,
और मैं दूर कहीं शायद, अपनी ऐनक को चमकाऊँगा ___

जब बैठ फ़रवरी को छत पर,
मैं बीते भादौं सा याद आऊंगा ___

तभी!

नन्हें हांथों को कीचड़ में फँसी गेंद निकालते देख़,

तुम्हारी कपकपाती गर्दन के ऊपर टिके हुए मुख से,
निकले स्वर सा  मैं और दूर हो जाऊँगा।

"छोड़ दो, अब आ जाओ घर,
बीती बारिश में है वह रोड टूट गयी___

मैं कल तुझको नयी गेंद ले दूँगी।"

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