Sunday, May 12, 2013

माँ !

धुप चढ़ी है आज सुबह से, और भू है ज्वर सा तपता,
इस पथरीले पथ पर, हूँ बस एक ही स्वर मैं जपता ___

मेरे पास म,
म पे आ की मात्रा,
और उसपे अँ की बिंदी है।

कठिन बड़ी है राह प्रणव ,पर कीर्तिवान मस्तक था___

हाँ।

मेरे पास म,
म पे आ की मात्रा,
और उसपे अँ की बिंदी है।

अक्षर तेरे, स्वर भी तेरे, तेरा ही गुडगान,
पितृपक्ष का नाम भले,पर हूँ तेरा ही इंसान,
था तेरा, मैं हूँ तेरा___
यह कभी नहीं कहते थकता ___

हाँ।

मेरे पास म,
म पे आ की मात्रा,
और उसपे अँ की बिंदी है।



 

No comments:

Post a Comment