Friday, October 18, 2013

फ़िर से …

फ़िर  से वही सफ़ेद शर्ट,
फ़िर  से वही 6 बटन,
फ़िर  से वही कैद,
फ़िर  से घुटन,
फ़िर  से पंखा,
फ़िर  से हवा,
लगती क्यूँ नहीं?

फ़िर  से दिन आया,
फ़िर  से रात होगी,
फ़िर  से ठण्ड से पहले,
वो आखरी बरसात होगी,
फ़िर से धूप भी होगी,
क़ायनात भी होगी,
फ़िर  से तुम भी होगे,
तुमसे बात भी होगी,
फ़िर  से वक़्त,
फ़िर  से वो घड़ी,
दिखती क्यूँ नहीं?

फ़िर  से पास,
फ़िर  से और पास,
फ़िर  से पास पास,
फ़िर  से आस पास,
फ़िर  से आस,
मिलती क्यूँ नहीं?

फ़िर  से फ़िर,
फ़िर  से और,
फ़िर  से जडें,
फ़िर  से बौर,
फ़िर  से जो आज है,
फ़िर  से होगा एक दौर,
फ़िर  से कोई प्रलय भी,
एक दिन आएगी,
फ़िर  से वो शर्ट भी,
मिटटी में मिल जाएगी,
फ़िर  से वही 6 बटन,
फ़िर  से पंखा,
फ़िर  से हवा,
लगती क्यूँ नहीं?


फ़िर  से हवा लगती क्यूँ नहीं?…



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