Friday, October 25, 2013

कुछ लोग

कुछ लोग!

बस "कुछ लोग" ही होते हैं,
कुछ …"लोग" ही होते हैं,
कुछ "होते" भी हैं,
और कुछ ही "हैं"।         जो लोग नहीं होते,

वो जो "हैं",
वो गलियों में कम,
चौराहों पर दिखते हैं,
जिन चौराहों पर दिखते नहीं,
वही चौराहे बन जाते हैं,

पर, वो कुछ ही "हैं"
जो लोग नहीं होते,
जैसे कुछ कुत्ते,
कुत्ते नहीं होते,
वो लोग बन जाते हैं,
पर उनमे भी,
कुछ ही "हैं",
जो लोग नहीं होते,

जैसे सब "मैं"
मैं नहीं होते,
उनमे कुछ "मैं भी" बन जाते हैं,
कुछ "हम भी" बन जाते हैं,
कुछ "हम" बन जाते हैं,
और कुछ "हमसफ़र" भी बन जाते हैं,
पर उनमे भी,
बस कुछ ही "हैं",
जो, लोग नहीं होते,

कुछ लोग, लोग नहीं होते,
वो बस "हैं",



 


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