Sunday, April 6, 2014

"अब मैं तुम पर बहुत कुछ लिखता हूँ।"

फिर, वो भी एक वक़्त था,
जब मैं घंटों तुम्हे रोकता था,
तुम्हे घर जाना होता था,
और मैं तुम्हारी उस blue dress को पकड़ कर बैठ जाता था,
"अभी बैठते हैं न कुछ देर और..
मैंने कुछ लिखा है, सुनाऊँ?"

तुम मुस्कुरा कर बैठ जाती,
मेरे गालों के बालों पर हाँथ फेरती,
और पूछती क्या लिखा है,
"कभी मुझ पर तो लिखते नहीं?"

फिर हम घंटों तुम्हारे जाने के बाद,
phone पर बातें करते,
उससे पहले कभी कुछ इतना खूबसूरत हुआ भी न था,

वो pizza जो हम फर्श पर बैठ कर,
मेरे Birthday कि बची मोमबत्ती कि रौशनी में खाते थे,
वो गाना जो मैं गाता था,
वो कहानियाँ जो अक्सर phone के कटने से पहले मैं सुनाता था,
हंसाता था,
उससे पहले कभी कुछ इतना खूबसूरत हुआ भी तो न था,



फिर, वो भी एक वक़्त था,
जब मैं 195 Rs (कभी 20 Rs extra, तो कभी 1 १/२ मीटर ) देकर
तुमसे मिलने आता था,
और तुम वो pink /black skirt (जिसपे वो सितारे जड़े थे) पहन कर,
आती!

 *trrrrrn*
शायद bbm पे कोई message आया है,
तुम्हारा नहीं है,
न ही तुम्हारा होगा अब,
मुझे पता है।

अब तुम वो skirt  नहीं पहनती,

तुम मुझे देख़ कर जो दूर से इशारे करती थी,
मैं समझता था,
"Just go and eat, and I love you".
पर मैं तुम्हे फिर से समझाने का इशारा करता,
जब तक तुम ओझल न हो जाती।

पर तुम्हारे message मेरे phone पर ऐसे नहीं आते थे,
सीने में बायीं तरफ जहाँ pocket  थी, कुछ शर्टों पे,
phone वहाँ पे ring करता था,
और vibrate कुछ और होता था।

फिर, वो भी एक वक़्त था,
" तुम बहुत कम बोलते हो, क्यूँ?"
"मैं जब तुमसे कुछ कहती हूँ, तो तुम जवाब नहीं देते,"
"क्यूँ नहीं हम लड़ते, बाकियों कि तरह,"
"चिल्लाते, परेशान करते,
क्यूँ तुम sorry बोल कर अक्सर चुप करा देते हो,
let's clear this out"

*trrrng*
ये भी तुम्हारा नहीं होगा,

फिर वो भी एक वक़्त था,
"just shut the fuck up

 bitch!"

कुछ टीस थी,
कुछ दर्द था,
क्रोध था,
और ख़ालीपन,
फिर.....
कुछ होठ थे,
कुछ बातें थीं,
कुछ से दो चार मुलाकातें थीं,
कुछ सिर्फ़ रातें थीं,
कुछ के संग बातों में रातें थीं,
कुछ रातों में बातें थीं।

उफ़ ये पंखा बहुत आवाज़ करता है,
"just shut the fuck up,
Bitch!"

अब तुम वो skirt  नहीं पहनती,

अब वो skirt तुम पहनती भी होगी  अगर,
तो कोई और देखता होगा,
कोई और तुम्हे रोकता होगा,
पर कोई तुम्हारी उस Blue Dress को पकड़ कर बैठेगा नहीं,
(वो अब तुम्हे Fit नहीं होगी)
कोई तुम्हें कुछ सुनाएगा क्या,
कोई sorry कहे न कहे,
कोई ये बोलने में इतना वक़्त नहीं लगाएगा,
"Just shut the fuck up,
Bitch!"

पर मैं सुनाऊँगा, कुछ लिखा है मैंने,

"अब मैं तुम पर बहुत कुछ लिखता हूँ।" 
























1 comment:

  1. Good one!! Deeply ingrained, detailed and reflects the imagination of young people in general..

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