Monday, February 8, 2016

ताक़त भी मिलेगी

अगर कहीं, गिरूँ  कभी ,
तो मुझे उठाने से पहले,
एक सुराख़ कर,
तुम, 
मेरा ख़ून  चखना ज़रा,
नमकीन ज़रूर होगा, और ताक़त भी मिलेगी। 
हाँ एक पल को पैर डगमगाएंगे तुम्हारे, B.P. तेज़ होगा 
पर तसल्ली रखना, कुछ देर, 
क्यूंकि ताक़त भी मिलेगी। 

मुझे लोग कहते हैं कभी कभी,
कि  थोड़ा सनकी हूँ मैं,
you know, crazy, unpredictable.
पता नहीं क्यों,
आज तक काटा  भी नहीं है मैंने किसी को, 
बंद कमरों के बाहर।  
लोग कहते हैं कभी कभी,
तुम पीते नहीं हो Pranav,
तो जीते हो कैसे, 
कुछ तो करते होगे, करो न एक बार 
अपने उन बंद कमरों के बाहर,

न कोई देखता है,
और न हि दिखता है ,
मेरा एक नाख़ून काफी वक़्त से नुचा पड़ा है, मेरे चमकते काले जूतों के भीतर,
वही है जिसे जोड़ता हूँ हर रात वीराने में,
तो जुड़ता नहीं, बस और तक़लीफ़ देता है,
शायद कभी जुड़े तो बताओं मैं,
चलता था कैसे, बिना लड़खड़ाए, बिना रोए गाये,
उन बंद कमरों के बाहर। 

फिर भी अगर गिरूँ कहीं ,
तो मुझे उठाने से पहले,
एक सुराख़ कर,
तुम, 
मेरा ख़ून  चखना ज़रा,
नमकीन ज़रूर होगा, और ताक़त भी मिलेगी। 

मेरी कोशिश तो बस ये है,
कि आवाज़  न हो ज़्यादा,
बस साज़, और मैं नाचता रहूँ,
मुझे रोको तुम, मैं रुकूँ भी कुछ पल, जैसे अभी,
पर ठहरूं नहीं,
बदहवास, मैं नाचता रहूँ। 
न ये रस्सी टूटे,
और न कसे  गला  कभी,
बस तीन Blades और टंगा मैं,
इस पँखे से ता- उम्र,
खो कर 
होशोहवास, बस नाचता रहूँ,

कभी तो हवा मुझे भी लगेगी। 
कभी तो ये ख़ून  आज़ाद होगा इन नसों से,
जब तुम पी रहे होगे,
तब पूछना, सब बताएगा,
कैसा उबलता था रात भर,
कैसे नहीं सोने देता था,
कैसे समझता था और समझाता था,
कि लाल नहीं, हैं रंग कई,
दिखेंगे तुम्हे,
चखना ज़रूर ,
नमकीन तो होगा हि,
और ताक़त भी मिलेगी। 










 




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