Monday, February 8, 2016

जैसे बहुत ज़ोरों से drum बज रहा हो,
Saxophone , Guitar , और bass 
शोर हो,  दिनों तक 
आवाजें  हों, 

और फिर सब खामोश,
इतना खामोश .. 
जैसे चांदनी गिरती है गीले पत्तों पर  बिना आवाज करे, 
सुबह के तीन बजे,
सर्दियों में, 
और मैं  खामोश कमरे में कैद हूँ , रौशनी नहीं है तो सांसें सुनता हूँ ,
पर डर  है जो छोड़ता नहीं,
ऐसी ख़ामोशी, जिसमे ख़ामोशी बोलती है, और मैं सुनता हूँ ,
सन्नाटा है, पर सुकून नहीं,

अँधेरा है, रास्ता भी होगा, पर दीखता नहीं,
और फिर एक पेड़ गिरता है,
पत्तों से लदा , गीला, इतना गीला की गिर जाती है चांदनी फिसल कर वहीँ,
मैं देखता हूँ उसे गिरते हुए, पल भर के लिए,
पर वो भी गुम हो जाती है,
वहीँ कहीं अँधेरे में,
एक बार को सोंचता हों,
चिल्लाऊं क्या,
शायद ख़ामोशी डर जाये,
पर आवाज नहीं निकलती,
कुछ महसूस नहीं होता,

कहीं तो होगा किनारा?
शोर नहीं चाहिए, पर इतना सन्नाटा?
कोई सिर्फ acoustic ही बजा दे उस शोर का,
तो कुछ सुकून आये,
कोई गाये नहीं,
बस एक कहानी सुना दे,
कि ये रात है, तो डर  है,
कल दिन भी होगा,
सितार भी होंगे,
एक तबले  पर किसी के हाँथ जब पड़ेंगे,
तब entry  लेना तुम.

 
मज़ा आएगा एक दिन. 


बजेंगे, guitar saxophone , और bass  भी होगा,
पर तुम्हे सिर्फ आवाज आएगी एक,
और मज़ा आएगा एक दिन। 

इसी खयाल को दबा के फिर से रुकता हूँ यहीं 
आँख खुली है ,और धड़कनें बहुत तेज़,
खाल नुची  है, जो दिखती नहीं, बस महसूस होती है, मेरे काले suit  के नीचे,
और मैं बैठा हूँ अभी भी इसी ख़याल को दबाये हुए,
की कोई कहानी सुनाये न सुनाये,
पर कभी तो वो वक़्त आएगा, शायद 
जब मज़ा आएगा। 

 


3 comments:

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  2. ये रात है, तो डर है..कल दिन भी होगा... सितार भी होंगे,
    aur ek kahani Bhi..
    Aankh khuli bhi Hogi aur dhakhane tez..
    Sukoon ke Saath dil mein ek rvani si hogi..
    Tab waqt wahin tham jayega..
    tumhe khyaal rahe ya na rahe ,
    mausam chup chap, yunhi Badal jayega.

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