Sunday, June 19, 2016

किराया share कर लेंगे।

ये वक़्त से पहले जो तुम्हारा मक़ान आ जाता है, हर रोज़
मुझे Car के दरवाज़े खोलने में तभी तक़लीफ़ होती है,
बुरा लगता है,
सारी ताब बिखर जाती है ,
टूटे हुए कांच के टुकड़ों की तरह,
लौटते वक़्त न वो झील अच्छी लगती है,
न मेरी बातों पर हसता है कोई,
अच्छा लगता है,
जो हर बार ख़याल पढ़ लेती हो मेरे,
कैसे करती हो?
मेरे jokes पे बराबर हसती भी हो,
मैं जब gear shift  करता हूँ,
तो हांथ भी रखती हो, मेरे हांथ पे,
फिर समझती क्यों नहीं,
कि मकान दूर है तुम्हारा घर से मेरे,
पर लगता है नज़दीक, तुम्हे छोड़ते वक़्त
बुरा लगता है।

एक सलाह दूँ?
मेरे साथ रह लो?
या मुझे साथ रख लो?
किराया share कर लेंगे।







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