Saturday, July 2, 2016

Read between the lines

इतना भरा हुआ है दिल,
छलक रहा है, 
थोड़ा आँखों से,
और बाकी बचे  हुए पानी में 
तैर रही हो तुम, 
(तैर रही हो तुम, देखो,
कितनी खूबसूरत शाम है,
"इतना दूर क्यों जाना,
पास बैठो?"... 
"मैं अभी आई"
कहके तुम चली गयी। 
शाम से रात हुई,
ठण्ड लगी,
अँधेरा भी हुआ, देखो
तुम चली गयी,

आज छाता नहीँ लाया,.... तो देखो,
बारिश भी हो गयी,
देखो कैसे भीग रही हैं यादें हमारी,
मैं समेटता हूँ, तो और फिसल रही हैं,
वो रही उस रात की,
और वो उस पहले wtsapp message के छोटे से Hi!
में फँसी बात की,
वो जो अब दूर , वहां दूर दिख रही है,
वो उस एहसास की, जब पहली बार हाथ रखा था हाथ पर तुम्हारे,
और वो रही तैरती, मेरे हाथ में तुम्हारे हाथ की,

पता तुमको भी था उस वक़्त, और पता मुझको भी था,
बात कुछ और थी,
और कह कुछ ही रहे थे हम,
आज कह रहा हूँ,
तो कहती हो, कल आना,
ये भी कोई बात हुई?
sim card बेंच रहा हूँ क्या?

देखो कैसे हंस रही हो,
और फिर कहती हो, "judge मत करना",
तोड़ रही हो, हर रोज़ ,
फिर कहती हो, "मत कर ना। "

देखो, कैसे कोई नहीं आया,
मुझे भीगता देख कर यहाँ,
ख़याल पढ़ कर, बस मुस्कुराते हैं,
और कहते हैं, "क्या लिखा है!"
क्या लिखा है?
आखिर तुम तो समझो,
तुम्ही ने तो सिखाया है

how to

Read between the lines.
















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