Saturday, August 6, 2016

प्यार जब ख़त्म होता है, तो तू क्यों रोता  है,
अरे मरता तो वही है, जो कभी ज़िन्दा होता है।

तभी, इंसान मरते हैं,
ईमान मरते हैं,
ख़ानदान मरते हैं,
मरते हैं लोग, बाग़,गीदड़, कुत्ते,
दिलों में बसे कुछ लोगों के भगवान मरते हैं,
शैतान भी मरते हैं,
जिनको जानता हूँ वो तो मरते ही हैं,
पर जिनको नहीं जानता, वो अंजान मरते हैं,

बस मरती नहीं थैलियां plastic की,

शुक्र है जो मर गया प्यार हमारा,
वरना इस ग़म से मर जाता मैं,
कि वो synthetic था।




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