Sunday, September 11, 2016

ये कहानी उस वक़्त की है।

ठहर जाओ तो सुनाऊँ,
पास आओ तो सुनाऊँ,
phone  पे कैसे करूं बयान ,
network कभी आता है, कभी जाता है,
बात कम होती है,
hello ..hello, ?और फ़ोन कट  जाता है।
पुरानी soul है,और बात उससे भी पुरानी,
tower लगे नहीं थे, तार बिछे नहीं थे,
हम मजबूर नहीं थे,

ये कहानी उस वक़्त की है। 

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