Sunday, September 11, 2016

दिल बहुत रोया।

बहुत ऊँचे सुरों से शुरू किया था,
तभी, जब bass Drop हुआ,
तो दिल बहुत रोया। 

सरगम से परे जो सुर लगते हैं,
उन्हें ढूंढने निकला था,
पर न जाने कब तुम मिले, 
बिछड़े, 
और दिल बहुत रोया। 

अब किस मुँह से गाओगे प्रणव,
हलक़ में फंसे है अल्फ़ाज़,
और तुम कमीज़ बदलते रहते हो,
कह लो किसी से, जो दर्द करता है,
छुपा रहे हो,
तभी, दिल बहुत रोया। 

वक़्त -वक़्त है,
चमड़ी कड़ी है, तो शायद सुन भी ले कोई, सुना डालो,
वरना धड़कन है, जो रुक जाती है,
रूह तो भटकती रहती है, बताने को 
जब रोया तो 
क्यों, दिल बहुत रोया।







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