Friday, November 25, 2016

पहली line लिखने में हमेशा दिक़्क़त महसूस होती है।
फिर इतना सब कुछ है बताने को,
सोचता हूँ शुरू कहाँ से करूँ?
कुछ कहानियाँ ऐसी हैं,
कभी share करता हूँ,    
"अपनों" से,
तो complain आती है 
और  मैं आगे कुछ नहीं कहता,
I just hold the glass and compliment. 
एक अजीब सा bubble है हर तरफ़,
जो और भी concrete होता जा रहा है,
pretty dresses ,shiny shoes,
और कई सारे खोखले डिब्बे,
जिनमे कैद हैं विचार,
और आज़ाद घूम रहे हैं opinions, और सिर्फ़ दो colors
- black and white. 

हर एक क़िताब का हर एक पन्ना और उसपे लिखा हर एक शब्द,
जैसे खो रहा हो अपना वजूद,
और दिख रहे हों शब्द सारे black &white,
पर उनमें छिपी रंगीन कहानियां नहीं दिखतीं ,











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