Wednesday, June 21, 2017

जज़्बात, एक तो थोड़े biased हैं,
और दर्द भी बहुत bully करता है,
तो हंसी बेचारी,.. सिर्फ़ और सिर्फ़ .. 
भीड़ के इकट्ठा होने पर ही,
निकलती है ..आजकल। 
अकेले में पाकर,
इतनी ज़ोर से गला घोंटता है,
खुशियों का,..  ये सूनापन,
कि चीखें भी नहीं आतीं,
और दिल रोता भी रहता है,
रात भर,
.... पर सिर्फ़ अकेले में,
और ये जज़्बात कुछ नहीं कहते,
हंसी पड़ी रहती है, 
और,...  आदमी रोता रहता है। 


-प्रणव मिश्र 


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