Saturday, November 4, 2017

behave करना कैसे था।

सीधे शब्दों में कहूँ, 
तो, अब भूल चूका हूँ,
behave,..  
करना कैसे था। 
साथ जीना कैसा था, 
बग़ैर, मरना कैसे था। 
तुम्हारी किस बात पे हसना था,
तुम्हारी किस बात पे रोना था,
तुम्हरे संग...  इतना दूर चलना था,
कितना दूर चलता था ?...
तुम्हारी हाँ में हाँ मिलाना कैसे था,
जज़्बात पढ़ना था, नहीं पढ़ना था?
तुम्हरी ख़ामोशी से बात,
करते रहना कैसे था,
साथ जीना कैसा था, 
बग़ैर, मरना कैसे था।
भूल चूका हूँ,
इश्क़ करना कैसे था,
सब उसके लिए करना था,
या ख़ुद के लिए करना था,
प्यार "नहीं"
जज़्बात "नहीं"
sex "नहीं,.. ok maybe"
मुलाकात "नहीं"
बात "नहीं"
कोई बात नहीं। .. 
कहके आगे बढ़ना कैसा था ?
भूल चूका हूँ,
तुम्हारी मौजूदगी,
और भूल चूका हूँ,
बग़ैर तुम्हारे,
रातो को नहीं ..डरना कैसे था? 

साथ जीना कैसा था, 
बग़ैर, मरना कैसे था। 


-प्रणव मिश्र 








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