Thursday, November 2, 2017

एक अँधेरे कमरे की,
सफ़ेद सिलवटों में,
गुस्ताखियाँ... कर रहा था वो,
और कई कोसों दूर से,
कर रही थी वो भी... 
कुछ,
गुस्ताखियाँ । 
एक तस्वीर देखते,
और परखते देर तक उसको,
वो शैतान था... 
ये सब जानते थे,
पर आज कई कोसों दूर से,
कर रही थी वो भी... 
कुछ,
गुस्ताखियाँ ।


- प्रणव मिश्र 


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