Tuesday, November 21, 2017

बात जो होनी थी, नहीं हुई...

बात जो कभी कही नहीं,
शुरू वहां से हुई,
पर, जो भी कहा गया उस शाम,
हर बात ख़त्म हो गयी। 
शिकायतें मुँह तक आयीं,
पर हलक़ से गालियां निकलीं,
उनके रिश्ते के मैल की,
आँखों से नालियां निकलीं... 
वो चीखता रहा,
वो चीखती रही,
वो देखता रहा,
वो देखती रही,
वो भीगता रहा,
वो भीगती रही,
फिर कुछ यूँ उठी,गयी,
कि मुलाक़ात ख़त्म हो गयी,
जो भी कहा गया उस शाम,
हर बात ख़त्म हो गयी। 
गुस्से का क्या करूँ बयान,
चीज़ें टूटनी थीं,.. तोड़ी गयीं,
cup फूटने थे,... फोड़े गए,
एक नए perfume की bottle भी मारी गयी,
कुछ बेहिसाब सिक्के भी फेंके गए,
हर वो चीज़ गिरी, गिरायी गयी,
जो आवाज़ करे,
बस बात ही थी,
वही हुई,
जो बदहवास करे,
उसको देखा मैंने जाते हुए,
फिर चिड़चिड़ाहट हुई,
दो बातों में तौल दिया,
प्यार, जो सालों चला,
और सिर्फ़ दो बातों से,
उनका हर दिन,
उनकी हर शाम,
और शाम की आज,
देखो हर रात ख़त्म हो गयी,
कुछ ऐसा कहा गया उस शाम,
कि हर बात ख़त्म हो गयी। 

-मिस्रा 





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