Thursday, August 30, 2018

ये ज़िन्दगी यूँ हाथ छोड़ देती है,
और आदमी कितना भी कोशिश कर ले,
पर फिसल जाता है,
कोई कुछ नहीं कर पाता,
फिर दुआएं होती हैं,
दवाएं होती हैं,
एक लड़का पैर सहलाता रहता है,
और एक पिता बीच- बीच में उठ कर,
उसको गले लगाता रहता है।
कितना मुश्क़िल होता है,
मौत का सामना करना,
एक countdown सा चलता रहता है
जिसका alarm और भी तेज़ होता जाता है,
कितना मुश्क़िल होता है,
सब जान कर भी तसल्ली देना,
"कुछ नहीं हुआ तुम्हें
ये दर्द है, जो सिर्फ़ सोचते हो तो है,
ये ज़िन्दगी भी इसी तरह, सिर्फ़ सोचते हो तो है। "
ये सिर्फ़ मौत है जो कोई सोचता नहीं,
... फिर भी है।


कितनी खोखली है ज़िन्दगी,
और मौत कितनी बुरी है,
तभी शायद ज़िनदगी समझ नहीं पाती, बस चलती रहती है यूँहीं,
और मौत से कोई किसी को बचा नहीं पाता।



-मिस्रा




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