Friday, September 28, 2018

फिर से

फिर एक दिन,... नशा उतरता है,
और वो अकेला खड़ा पाता है, फिर से ख़ुद  को,
फिर से कोई तैर कर, बहुत दूर चला जाता है,
और वो हौसला दिलाता रहता है फिर से ख़ुद को,

फिर से सांसें बहुत तेज़ चलती हैं,
फिर से कोई अपना phone बंद करके सो जाता है,

फिर... एक दिन जादू टूटता है,

वो चादर का एक धागा खींच लेती है,
... और भागने लगती है,
वो भी भागता है पीछे-पीछे,
आवाज़ देता है,
पर वो छुप जाती है कहीं,
और वो उसे ढूंढ नहीं पाता है,
अकेला लौटता है उस रात,

रात बीतती है, दिन बदलता है,
फिर वो भी लौट आती है शाम तक,
पर वो चादर जिसका धागा नोच कर यूँ भागी थी वो,
तब तक काफ़ी छिज जाता है,

तो ठण्ड में वो भी सोती है,
और ठण्ड में वो भी सुलाता है  फिर से ख़ुद को।

-मिस्रा 

1 comment:

  1. वो सोती भी है या नहीं, क्योंकि सुबह उसे मिलते है
    चाय के गंदे प्याले, सिगरेट के अधजले टुकड़े, लेकिन वो नहीं दिखती, उसका सर फिर से चकराने लगता है जैसे फिर से कोई नशा उतरा हो

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