Tuesday, September 4, 2018

potent

यहाँ एक गंध है जो उँगलियों में कहीं रह जाती है,
थूक में बनी हुई खाल की चाशनी की गंध,
'potent'. 
यहाँ दो जांघें हैं,
जिनके सिरे पर फिसलन है,
किसी नदी घाटी के किनारे जमी काई पे पड़ी बारिश की बूंदों सी... 
जिस पर हाथ पड़ते ही इंसान फिसल जाता है,
कोई कैसे रोके ख़ुद को, जब ईमान फिसल जाता है। 
यहाँ पुतलियों में डूब जाती हैं नज़रें,
पलकों में उलझ जाती है ज़िन्दगी,
यहाँ तर्जनी कुछ ढूँढा करती है,
उसकी भी,... 
... मेरी भी। 
यहाँ एक गंध है जो तर्जनी में कहीं रह जाती है,
थूक में थकी हुई भ्रमण की सूखी हुई गंध। 


-मिस्रा 







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