Friday, October 12, 2018

कैसे हर तरफ़ एक बन्दर नाच है,
उसी के बीच में नाच रही हो तुम,
....कैसे कितना व्याकुल हो तुम,
मैं हैरान हूँ ये देख कर,..
पहले तो छल्ले उड़ा -उड़ा  कर नशे में,
तुमने कैसे मेरे अरमानों को फूँक लिया,
नशा हुआ?
अब hangover तो होगा ही।
और ये सर तुम्हारा जो buzz कर रहा है न?
ये वो चरस है।
...जो अब भी बो रही हो !

बीमार हो तुम। 

 (ये कैसी कविता है?)


-मिस्रा








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