Monday, October 15, 2018

एक पल को खुद को इस सब से निकाल कर देखता हूँ,
तो बहुत अजीब लगता है,
ये नियम, क़ायदे,
तमगे, वायदे,
लोगों की हर एक बहस में टूट पड़ने की इच्छा।
हर एक party में जो जितना बचकाना होता है,
.. लोग उसे उतना पसंद करते हैं,
जितना loud, उतना important.
कितना आसान है, लोगों को रिझाना यहाँ,
पर मुझे अजीब लगता है।
लोगों को एक पल के लिए,
अगर हम currency मान लें,
तो यहां जो जितना ओछा है,
वो उतना अमीर होता है।
कितना आसान है,
नाम कमाना यहां,
तरीक़े हैं,..
पर मुझे अजीब लगता है।
न जाने कैसे खड़े रहते हैं लोग सतह पर,
यहाँ पर इतना बड़ा गड्ढा है,
मैं सोचता भर हूँ, तो धंसता जाता हूँ।


-मिस्रा

1 comment:

  1. Hmmm......Ajeeb lagta hai door se usko jhoomta hua dekhkar. Log uski har baat pe kehkahe lagate hain aur main chupchap sa ek kone me. Uski kahi baaatein kuredne ki koshish karti hain,ek muskaan, mere chehre par, lekin,shayad wo baatein chichli aur blunt hai. Itna painapan nahi hai uski baaton me.

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